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Monthly Archives: जुलाई 2012

DESH / मेरा देश है ऐसा- एक कल्पना

मेरा देश है ऐसा
यहाँ कोई बेईमान नहीं, कोई घूसखोर या कोई हैवान नहीं .
लड़ते है, बहस करते हैं, पर एक दूजे की लेता कोई जान नहीं.
कोई धन जमा करके,तिजोरियां भरता नहीं
करते सब काम यहाँ ,भूखा कोई सोता नहीं.
शिक्षा यहाँ हर किसीको, मुफ्त में उपलब्ध है,
कौन बड़ा,कौन छोटा,कोई भेदभाव नहीं.
बेफिक्र घूमे सब कोई अपराध नहीं
लड़की हो या लड़का,करे कोई परेशान नहीं.
कोई भी त्यौहार हो, मिलजुल मनाएं सभी,
धर्म के नाम पर कोई भी विवाद नहीं.
ऐसा देश मेरा जिसपे हम सबको गर्व है
जान मांगे जान दें , कोई ऐतराज नहीं.

~Indira

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JADOO KI JHAPPI/जादू की झप्पी

जादू की झप्पी

बहुत पड़ी थी डांट
शरारत खूब जो की थी
खींचे गए थे कान
शिकायत सबने की थी
रोना धोना किया खूब
और बिन खाए ही सो गए
नींद में किसने सर सहलाया
गालों पे दी पप्पी
अरे!मना रही थी अम्मा,
दे जादू की झप्पी|

HO NA HO/ जिन्दगी

नज़रों से नज़रें मिलीं,
दिल ने दिल से बात की ‘
शब्द अर्थहीन लगें
हों ना हों |
मन मिले, मिले विचार,
आत्मा से आत्मा,
तन की बिसात  क्या ,
हो ना हो |
दोनों ने एक दूजे को,
प्यार दिया, मान दिया
सौगातों की दरकार क्या ,
हों ना हों |
दोस्ती जनम जनम की,
जिन्दगी भी जी ही लिए
मौत से अब डरना क्या ,
हो तो हो |

~Indira

BADLAV ( change)/बदलाव

जिंदगी चल रही है बड़ी रुक रुक के
इसमें कोई बहाव होना चाहिए
बचपन और जवानी में खूब भटक लिए
बुढ़ापे में थोडा ठहराव होना चाहिए
जिंदगी कटी यहाँ वहां घूम घूम के
अब तो कोई पड़ाव होना चाहिए
बदला ना कभी खुद को अपनी जिद में जिए
अब तो कोई   बदलाव  होना चाहिए

pencil sketch by Indira

BETIYAN/ बेटियां

कहीं एक बेटी जिन्दा दफनाई गयी
कही एक बेटी अस्त्रोपचार कर बेटा बनाई गयी
कही कोई दहेज़ के वास्ते
जिन्दा जलाई गयी
बेटियों की ये दशा देख मन बहुत रोता है
चीख चीख कहता है
‘अगले जनम मोहे बिटिया तो कीजो
पैर ऐसी जगह जनम ना दीजो’
जहाँ
मुझे पूजा तो जाये पर
समान हक दिया ना जाये
आगे बढ़ने का
अवसर ना दिया जाये
मैं किसे जीवनसाथी चुनू ,
मेरी कोंख से कौन जनम ले
ये चुनने का हक मुझे ना दिया जाये
साधू संतों ,ज्ञानी गुनियों के इस देश में
इतना अनादर मुझसे
सहा ना जाये
नहीं चाहिए पूजा
नहीं चाहिए आसमान के चाँद तारे
मुझे तो चाहिए बस वही देश जहाँ
प्यार हो ,सम्मान हो
और मुझे आंसू ना दीजो
बस अगला जनम वहीँ पे दीजो.

ज्ञान की भीख/ Gyan Ki Bhikh

हिंदी मेरी मातृभाषा है अत: मेरा एक हिंदी ब्लॉग होना ही चाहिए जिसमे मैं अपनी भाषा में अपने मन के उदगार लिख सकूँ |

सारा जीवन घूम के, ज्ञान के मोती जमा किये,
सोचा साथ ना जायेगा, कहाँ मैं घूमू लिए लिये |
मोती बाँटन ज्ञान के ,जब बंजारा हुआ खड़ा ,
देखा यहाँ तो हर कोई, है मोती से हुआ जड़ा|
शीश झुकाया उसने सबको,और ये बात है मानी,
समझदार हैं सभी यहाँ ,सभी यहाँ पर ज्ञानी|
अब उसने है बंद की, देना सब को सीख,
अपना ज्ञान भुलाकर मांगे ,सबसे ज्ञान की भीख |

~Indira

Babsje Heron

Great Blue Herons: A study in patience and grace

P.A. Moed

Creative Exploration in Words and Pictures

Globe&Life

Through life and strife, all may still thrive.

Mugilan Raju

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Canadian/Norwegian Blogger & Freelance Writer

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