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Category Archives: मेरी रचनाएँ

NIYATI/ नियति

जब जब स्वीकार किया रोना  मेरी नियति है

 ज़िन्दगी नए नए रंग लिए सामने आई
हंसाने ,रिझाने, मनाने
फिर से मुस्कराने के बहाने लाई
जब जब हँसना चाहा
दुखों ने अपनी जमात बिछाई
कहाँ खो रहे हो
हम भी हैं  झेलने को
इसकी गुहार मचाई
समझ नहीं आता क्या करू
जब हंसी आये तब रोऊँ
या जब रोना आये तब हसूँ
ज़िन्दगी यूं ही मुझे चकमा देती रहे
और में हर बार एक नए जाल में फसूं

अजीब मगर सच्ची

हीरा चढ़ता मत्थे पे, पत्थर ठोकर खाए ,
ईश्वर  मूरत में ढले, पत्थर भी उबरे जाए |
 दिन भर खट  कर  भी कोई, भूखे  पेट सो जाए ,
बिन मेहनत की  पुरोहिती, पेट भरे जस पाए |
औरत मेहनत कर मरे , फिर भी पीटी  जाए,
पैसा शक्ति, लाये तभी , मंदिर में पूजी जाए |
जब तक मतलब साथ थे, पूछ पूछ के अघाये,
पंख ने  भरी उड़ान सब को दिया भुलाए |
छाप अंगूठा रोये क्यों,  राजनीति  घुस जाए,
पैसा पॉवर मिले तो, सर्वगुन्न  कहलाये |
सब कुछ पाया प्रेम न पाया, जिया काहे  अकुलाये,
माया, काया  के चक्कर,  जब जीवन दिया गवाए |

प्याज पुराण

कैसे दिन हैं आ गये; मंत्री बेचे प्याज ,
लूट करोड़ों खाए थे,सबके उतरेंगे ताज ।
सूखी रोटी नमक से; और साथ में प्याज ,
भूखों का मेवा था ये, उसको भी तरसे आज।
सब्जी तो महंगी हुयी; और रुलाये प्याज ,
भूखे पेट करें तो कैसे राम भजन और काज।
सोच विचार नेतागण भैय्या; सस्ते बेंचे प्याज,
पुलकित मन में, वोट मिलेंगे, और करेंगे राज।

~ Indira

onions

MUFT GYAN/ मुफ्त ज्ञान

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क्या पता बारिश इस बार भी दगा दे , बादल देख कर मटके फोड़ा नहीं करते |

सदियाँ गुज़र जाती हैं रिश्ते बनाने में, एक जरा सी बात पर रिश्ते तोड़ा नहीं करते |

क्या पता कौन कब दगा दे जाए, एक ही मुलाकात में रिश्ते जोड़ा नहीं करते |

खामोखां किसी को कोई मुगालता क्यों हो, उँगलियों से यूँ पल्लू मरोड़ा नहीं करते |

हर कोई आपके हुस्न का दीवाना नहीं है,यूँ ही बेमतलब हिज़ाब ओड़ा नहीं करते |

न जाने कौन अजनबी कब मीत बन जाए, किसी को देख कर यूँ मुंह मोड़ा नहीं करते |

तरक्की पर तो हर किसी का हक़ है, दूसरों की राह का रोड़ा नहीं बनते |

आराम करने के मौके तो मिलेंगे बहुत, यूँ ही बेवक्त खटिया तोड़ा नहीं करते

जाने वाला चल दिया तनहा छोड़ कर, यूँ ही हंस कर गम थोड़ा नहीं करते |

मज़हब तो दिलों को मिलाने को बना है, मज़हब के नाम पर सर तोड़ा नहीं करते |

_ Indira

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PREMRAAG/ प्रेमराग

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प्रेम क्या है मुझे पता नहींप्रेम क्या नहीं है वो बताती हूँ |

प्यार रास नहीं,रंग रोमांस नहीं
मन में पल भर को उठा
कोई खुमार नहीं|
प्यार सौदा नहीं,कोई व्यापर नहीं
तू ना दे तो में ना दूं
ऐसा कारोबार नहीं|
सृष्टि बस मेरी,किसीऔर का अधिकार नहीं
जब हो सोच ऐसी
फिर तो वहां प्यार नहीं|
प्यार अकृतज्ञता नहीं
इर्ष्या और स्वार्थ नहीं
कटुता और हिंसा से
इसको सरोकार नहीं|
इसके बाद जो भी बचे वोही तो प्यार है
तुम स्वयं प्यार हो बाकि सब बेकार है|

http://rosesandcoffee.wordpress.com/2014/11/18/what-is-love/

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प्रेम क्या है मुझे पता नहींप्रेम क्या नहीं है वो बताती हूँ |

प्यार रास नहीं,रंग रोमांस नहीं
मन में पल भर को उठा
कोई खुमार नहीं|
प्यार सौदा नहीं,कोई व्यापर नहीं
तू ना दे तो में ना दूं
ऐसा कारोबार नहीं|
सृष्टि बस मेरी,किसीऔर का अधिकार नहीं
जब हो सोच ऐसी
फिर तो वहां प्यार नहीं|
प्यार अकृतज्ञता नहीं
इर्ष्या और स्वार्थ नहीं
कटुता और हिंसा से
इसको सरोकार नहीं|
इसके बाद जो भी बचे वोही तो प्यार है
तुम स्वयं प्यार हो बाकि सब बेकार है|

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AJEEB BAAT/ अजीब बात

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बड़ी अजीब बात है
बड़े प्यारे नगमे हैं,गज़लें हैं,गीत हैं ,
पर हिट लिस्ट में कुछ और ही गीत आते हैं.
महान कवि नीरज
फिल्मों में सन्डे को प्यार हुआ,monday इकरार हुआ
लिख आते हैं.
गुलज़ार दिल को छूने वाले नगमों के बाद, ‘बीडी जलायले जिगर ‘से ज्यादा नाम कमाते है.
जावेद जी ,जिनके हर नगमे पे हम दिल वार आते हैं,
एक,दो,तीन, चार…………बारह,तेरह से, ज्यादा प्रसिद्धि पाते हैं.
दिल को छूने वाले नगमे हम बस उदासी में
या महफिलों में गाते,सुनते,और सुनाते हैं
पर हिट?
कोलावारी-डी को करवाते हैं.

Kanhi Par Koi Roya Hai Kya? /कही पे कोई रोया है क्या?

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हवा में गीलापन सा क्यों है कहीं पे कोई रोया है क्या?

महलों में  सब सुविधा पाकर भी कोई तो   हँस  ना पाए,

जूठन पाकर झोपड़ीवाला  ख़ुशी के मारे  रोया है क्या?

दिन भर खूब मजूरी की पर  शाम को खाना  घर न आया

बिलख बिलख कर रोते कोई  भूख का मारा  सोया है क्या ?

अपने लालच में जो सारे  पेड़ तो हमने  काट लिए,

बीज कभी भी बोये नहीं,ये सोच के कोई रोया है  क्या?

बेटियां कितनी बलि चढ़ा  दी ,एक बेटे  के लालच में ,

आज उसी बेटी की खातिर माँ का दिल कहीं  रोया है क्या?

सागर से मिलने वाली  नदियों का जल जब  सूख  गया,

आस लगा कर बैठा सागर,बिलख बिलख कर रोया है क्या?

पापों का लेखा जोखा कर कहीं कोई ग़मगीन हुआ क्या

कहीं कोई शैतान ठिठक कर हँसते हँसते रोया है क्या?

यूं तो कारण बहुत मिले , रोज़ रोज़ हँसने  गाने के

बहलाने को चेहरा छिपाकर, बार बार मुंह धोया है क्या

हवा में सीलापन सा क्यों है ?कही पे कोई रोया है क्या?

~इंदिरा

KHUCHH SAWAL/कुछ सवाल ???

कुछ सवाल ???

देश के नेताओं, पुलिस , और कुछ पुरुष (?) वर्ग के के उलटे सीधे बयां बड़ा परेशां करते हैं
कुछ प्रश्न मन में उमड़ते घुमड़ते हैं जिनके जवाब ढूंढे नहीं मिलते हैं
हुज़ूर!  कब और कैसे   औरतों को सुरक्षा प्रदान कर पाएंगे
अगर साड़ी  महिलाएं बुरखा पहन लें तो आप निर्लिप्त हो जायेंगे
छेड़खानी और बलात्कार से अपने को रोक पाएंगे
या फिर
लड़कियां महिलाएं घर में बंद बैठ जाएँ तो आप भी खुद को सम्हाल पाएंगे
आप तो नादान लड़कों को भी नहीं छोड़ते
कोई हद कोई लक्ष्मण रेखा तो बनाइये
औरत कुर्बानी की कितनी  हद है
जो आप को आपकी लक्ष्मण रेखा में बाँध रखे
या आपके लिये कोई सीमा,कोई लक्ष्मण रेखा नहीं है
आप माँ, पत्नी, बहन पर अत्याचार के लिए स्वतंत्र हैं
आप से बुद्धिमान,कुशल महिला आपसे देखी   नहीं जाती

Image0221हंसती खिलखिलाती महिला आप से देखी नहीं जाती
पर काटने को  आपकी आत्मा बैचैन हो जाती है
कहीं सब पर से आपका राज खत्म हो जाए
यही बात आपको सताए चली जाती है
आपके हिसाब से तो
लड़की जन्म ही नाले तो सारे अपराध खत्म हो जायेंगे
भ्रूण हत्या , दहेज़ प्रथा , छेड़खानी, बलात्कार सभी खत्म हो जाएँ
बस आप ही का राज हो, देश संसार धीरे धीरे बर्बाद हो आप को क्या
अभी आप राज करो फिर आप का बेटा
उसके बाद दुनिया खत्म हो जाए तो आपका क्या ???

~Indira

 

APNI JANG/अपनी जंग

अपने अपने आंसुओं को आँख में ही थाम रखो
कौन समझेगा तेरे आंसुओं का मोल यहाँ
सब उठाये फिरते हैं अपने दुखों का सलीब
कौन साथ दे और मरहम लगाएगा यहाँ
जो साथ आये रोने वो कम ग़मगीन न थे
जो भी रोया साथ आपबीती पे रोयेगा यहाँ
जोश भर हिम्मत जगा अपनी जंग खुद ही लड़,
है सबकी अपनी अपनी जंग हौसला कौन देगा यहाँ
अपने दुखड़े सुना सुना दूसरों को पस्त न कर
कौन सुने तेरी सुनाने को सब बेताब यहाँ
करोड़ों हड़प के भी नहीं मिटती है भूख उनकी
कौन तय करेगा असली भिखामंगा है कौन यहाँcat on the beech

Desh Ka Haal/ देश का हाल और लोग बेहाल

आप तो खामोखा नाराज हो जाते हैं
देश के हाल पे क्यों इतना बवाल मचाते हैं
क्या आप दुखी हैं किबहस का मुद्दा
कालाधन, भ्रष्टाचार ,नीतिहीनता क्यों है ?
अरे भाई ,
कालाधन, भ्रष्टाचार ,नीतिहीनता अगर देश प्रेमी और स्वार्थहीन चलाते
तो गरीबों की समस्याओं, शिक्षा और,देश उन्नति पर बहस बिठलाते ।
शासन राजहंसों के हाथ हो
तो, मोती , हिमालय, मानसरोवर
और पवित्रता पर बहस होगी
और शासन अगर कौओं के हाथ हो
तो बहस भी छिछ्ड़ों पर ही होगी |

Picture Perfect Memories for life

Myriad memories frozen in time

A Journey Called Life ...

“Never forget that once upon a time, in an unguarded moment, you recognized yourself as a friend.” - E. Gilbert

Timeless Mind

All about self realisation, paranormal, dream interpretation and more

Life in Copenhagen

Life in Copenhagen, Denmark, after moving during Covid-19.

Agapē Words of Hope Ministry

Words to Encourage, Inspire & Empower

Banter Republic

It's just banter

Glee Sparkle

See Miracles In Life Everyday

satyaanveshan

My Psychological and Spiritual Odyssey!

कही अनकही बातें

जो हमपे गुज़री सो गुज़री मगर शब-ए-हिज्राँ हमारे अश्क तेरी आक़बत सँवार चले

Nit@94

अभिव्यक्ति

rishabh_myjoopress

a poetic journey with memories

Into the Light Adventures

By Sandra Js Photography - Make the rest of your life the best of your life.

ESSENTIAL INFINITY

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