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Category Archives: हिंदी कविता

वादा

बस 

अभी आता हूँ 

तुम रुको 

वादा रहा 

तुमने कहा 

मैं 

तब से इंतज़ार में हूँ 

दिन बीते 

रातें बीतीं 

मौसम बीते 

अब तब करते करते 

न जाने कितनी 

सदियाँ बीतीं  

ना तुम आये 

ना कोई पाती

ये अब कितना लम्बा होता है 

कोई मुझे समझाए  

~Indira

 

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भाव

ख़त  जले राख बन कर उड़ गए

भाव तो दिल पर खुदे थे रह गए

कितने ही रंग भरो 

कितने ही रंग भरो 

कुछ बच  ही जाता है 

कितने ही ख्वाब बुनो 

कुछ छूट ही जाता है 

जीवन है एक पहेली 

या फिर  एक भूलभुलैया 

ढूढ़ने की कोशिश में 

कुछ हाथ न आता है 

मत मतलब ढूंढो तुम 

न मक़सद करो तलाश 

जितने भी रंग मिलें 

उनसे ही सजाओ जीवन 

जो इससे चुकेगा 

पीछे ही रह  जाता है 

 

Maa/ माँ

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बचपन में कहते

माँ एक कहानी सुना
अब कहते माँ
कोई कहानी मत बना
पहले मेरे  आंसुओं पर
तुम्हारे आंसूं पड़ते  निकल
अब मां  के आंसूं
लगते  इमोशनल  ब्लैकमेल
कहाँ कोई गलती हो जाती है
या शिक्षा में खुछ कमी रह जाती है
समझने समझाने में
एक उम्र निकल जाती है
खुशनसीब मिलता है वो
जिन्हे मिलता प्यार उम्र भर
वर्ना कई दाने दाने को तरसते हैं
भटकते हैं दर बदर
~Indira

मलाल / Malal

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बींधा
तीखी बातों से
एक दूजे को
हरदम
अब देखो वो जख्म
भीतर कैसे पलता है
लाख बिसारना चाहो
कांटे सा कसकता है
टीस उठे  हर  वक़्त
मरहम काम  ना करता है
नासूर बन न  जाये कहीं
हरदम  खून सा रिसता  है
वक़्त पर माफ़ी
मांग ली होती,
रहता नहीं मलाल
तुम भी चुप बैठे रहे
जैसे फर्क क्या पड़ता है
अहम् हमारा टकराये
मन कांच दरकता है
मन आहत पर
चेहरा बुजदिल
मुस्कानों को ढोता
हर रिश्ते का
एक मुखौटा
चिपका लेता है
~ इंदिरा

नाते -रिश्ते 

कितने नाते टूट गए 

कितने साथी रूठ  गए 
हम तो जहाँ थे  वहीँ रहे 
ना  जाने  सब कहाँ पर छूट गए 
नए नए साथी, नए नए रिश्ते 
बने  भी और बिखर गए 
जिससे  जितनी लिखी थी 
उतना ही साथ निभा गए 

यादें ही रह जाती हैं 

बस बातें ही बच जाती हैं 
कमी बहुत खलती है  मगर
दिन भी यूं ही  गुज़र गए 
भीड़ में आँखे खोजती हैं 
भूले , भटके ,कोई मिल जाए 
पर दुनिया एक सराय  है 
स आये, ठहरे और चले  गए 
~ इंदिरा 

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस/Women’s International Day/ Hindi Kavita/ ईमानदारी

Women’s International Day एक प्रस्तुति

बस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
पर सम्मान,

बाकि दिन टालमटोल  ,

इसमें ए नादान  दुनियावालों,

ईमानदारी कैसी?

बेटे, बेटी में करे फर्क, 

न दे बराबर का हक़ और सम्मान,

  वो ममता कैसी ?

बहू  बेटी में करे फ़र्क़,

लाख झगडे पर बहू को न मनाये 

तो सासु माँ कैसी ?

सबकी सुनते रहे, 

किसी से न शिकायत की 

ऐसी भी दोस्तों अच्छाई कैसी?

कितनी भी टूटे, 

मोतियों सी पिरोई न गयी, 

वो दोस्ती, वो रिश्तेदारी कैसी?

प्यार का वादा ,

साथ निभाने की कसमें ,

झूठी हो जाएँ तो,

वफ़ादारी  कैसी? 

खुदा ने नहीं किया फर्क 

देने में नियामत अपनी,

फिर बन्दे तेरी हुकुमदारी कैसी?

~ Indira

 

Happy woman jumping on beach

Image source-

https://www.achhikhabar.com/2013/03/07/international-womens-day-in-hindi

 

 
 
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