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Tag Archives: जिंदगी

हौसला

कभी कभी हमबिस्तर भी मीलों दूर हो  जाते हैं
कभी हजारों मील दूर भी दिल के पास आजाते हैं
बस! दिलों में प्यार होना चाहिए|
कभी तो  थाली भर भोजन भी तृप्त नहीं कर पाता है
कभी तो सूखी रोटी में  भगवान  नजर आ जाते हैं
बस! भूख होना चाहिए|
कभी हजारों पन्नों में भी  दिल की बात नहीं आती है
कभी कभी तो एक नजर भी  कितना कुछ कह जाती है
बस! व्यक्त करना आना चाहिए |
कभी हवा का झोंका भी धराशायी कर जाता है
कभी हजारों तूफां भी हिला नहीं तुम्हें पाते है
बस! हौसला होना चाहिए|

~Indira

फलसफा

Reflexion

Reflexion

देखिये तो लोग

यहाँ कितने मूढ़ हैं

काटे  उसी डाल  को
जिसपर आरूढ़ हैं
जो भी बोया काटे वही
जो भी दिया पाये वही
जीवन का फलसफा
इतना भी  नहीं गूढ़ हैं
– Indira
Thursday 7W in Hindi 6.8.15

MAN( मन)

 मन
मन एक अबूझ पहेली सा है                                  confused cat
भीड़ में अकेला
और
अकेलेपन में भीड़ से भर जाता है
कभी कभी निन्यानवे के चक्कर में पड़ेगा
कभी बिना कुछ ही खुश हो जाता है

वैसे  बकबक करता रहता है

अनवरत

सोने भी नहीं देता पर कुछ लिखने  कोशिश करो
तो सब बिसरा सा  जाता है
समझ नहीं आता
यह बस मेरा हाल है
या, सभी के साथ ऐसा हो जाता है
कौन इसे समझाए
जितना  कुछ पकड़ पाओ तो सोना है
वरना  सब मिटटी हो जाता है.

अजीब मगर सच्ची

हीरा चढ़ता मत्थे पे, पत्थर ठोकर खाए ,
ईश्वर  मूरत में ढले, पत्थर भी उबरे जाए |
 दिन भर खट  कर  भी कोई, भूखे  पेट सो जाए ,
बिन मेहनत की  पुरोहिती, पेट भरे जस पाए |
औरत मेहनत कर मरे , फिर भी पीटी  जाए,
पैसा शक्ति, लाये तभी , मंदिर में पूजी जाए |
जब तक मतलब साथ थे, पूछ पूछ के अघाये,
पंख ने जिस दिन भरी उड़ान सब को दिया भुलाए |
छाप अंगूठा रोये क्यों,  राजनीति  घुस जाए,
पैसा पॉवर मिले तो, सर्वगुन्न  कहलाये |
सब कुछ पाया प्रेम न पाया, जिया काहे  अकुलाये,
माया, काया  के चक्कर,  जब जीवन दिया गवाए |

MUFT GYAN/ मुफ्त ज्ञान

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क्या पता बारिश इस बार भी दगा दे , बादल देख कर मटके फोड़ा नहीं करते |

सदियाँ गुज़र जाती हैं रिश्ते बनाने में, एक जरा सी बात पर रिश्ते तोड़ा नहीं करते |

क्या पता कौन कब दगा दे जाए, एक ही मुलाकात में रिश्ते जोड़ा नहीं करते |

खामोखां किसी को कोई मुगालता क्यों हो, उँगलियों से यूँ पल्लू मरोड़ा नहीं करते |

हर कोई आपके हुस्न का दीवाना नहीं है,यूँ ही बेमतलब हिज़ाब ओड़ा नहीं करते |

न जाने कौन अजनबी कब मीत बन जाए, किसी को देख कर यूँ मुंह मोड़ा नहीं करते |

तरक्की पर तो हर किसी का हक़ है, दूसरों की राह का रोड़ा नहीं बनते |

आराम करने के मौके तो मिलेंगे बहुत, यूँ ही बेवक्त खटिया तोड़ा नहीं करते

जाने वाला चल दिया तनहा छोड़ कर, यूँ ही हंस कर गम थोड़ा नहीं करते |

मज़हब तो दिलों को मिलाने को बना है, मज़हब के नाम पर सर तोड़ा नहीं करते |

_ Indira

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SAATH/ साथ

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साथ

प्यार कब तक रहेगा बस इतना बतादो।

ना मुझसे करो चाँद तारों की बातें ,ना महलों ना मह्गीं सौगातों की बातें,
साथ कब तक रहेगा इतना बतादो, प्यार कब तक रहेगा बस इतना बतादो
इबादत नहीं चाहिए मुझको तेरी, पलकों पर बिठा कर भी ना तुम मुझको रखना,
साथ कब तक रहेगा बस इतना बतादो, प्यार कब तक रहेगा बस इतना बतादो|
राह दुश्वार हो फेर मुंह तुम ना लोगे ,आंधी तूफां में भी हाथ थामे रहोगे
साथ मुश्किल में दोगे बस इतना बतादो, प्यार कब तक रहेगा बस इतना बतादो।
ज़ुल्फ़ ज़र होगी इकदिन तुम्हे तो पता है,जवानी ढलेगी तुम्हे तो पता है,
साथ मरने तक दोगे बस इतना बतादो,

प्यार कब तक रहेगा बस इतना बतादो।

 

Indira's Blog

ना मुझसे करो चाँद तारों की बातें ,ना महलों ना मह्गीं सौगातों की बातें,
साथ कब तक रहेगा इतना बतादो, प्यार कब तक रहेगा बस इतना बतादो
इबादत नहीं चाहिए मुझको तेरी, पलकों पर बिठा कर भी ना तुम मुझको रखना,
साथ कब तक रहेगा इतना बतादो, प्यार कब तक रहेगा बस इतना बतादो|
राह दुश्वार हो फेर मुंह तुम ना लोगे ,आंधी तूफां में हाथ थामे रहोगे
साथ मुश्किल में दोगे इतना बतादो, प्यार कब तक रहेगा बस इतना बतादो।
ज़ुल्फ़ ज़र होगी इकदिन तुम्हे तो पता है,जवानी ढलेगी तुम्हे तो पता है,
साथ मरने तक दोगे इतना बतादो, प्यार कब तक रहेगा बस इतना बतादो।

~Indira

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Kanhi Par Koi Roya Hai Kya? /कही पे कोई रोया है क्या?

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हवा में गीलापन सा क्यों है कहीं पे कोई रोया है क्या?

महलों में  सब सुविधा पाकर भी कोई तो   हँस  ना पाए,

जूठन पाकर झोपड़ीवाला  ख़ुशी के मारे  रोया है क्या?

दिन भर खूब मजूरी की पर  शाम को खाना  घर न आया

बिलख बिलख कर रोते कोई  भूख का मारा  सोया है क्या ?

अपने लालच में जो सारे  पेड़ तो हमने  काट लिए,

बीज कभी भी बोये नहीं,ये सोच के कोई रोया है  क्या?

बेटियां कितनी बलि चढ़ा  दी ,एक बेटे  के लालच में ,

आज उसी बेटी की खातिर माँ का दिल कहीं  रोया है क्या?

सागर से मिलने वाली  नदियों का जल जब  सूख  गया,

आस लगा कर बैठा सागर,बिलख बिलख कर रोया है क्या?

पापों का लेखा जोखा कर कहीं कोई ग़मगीन हुआ क्या

कहीं कोई शैतान ठिठक कर हँसते हँसते रोया है क्या?

यूं तो कारण बहुत मिले , रोज़ रोज़ हँसने  गाने के

बहलाने को चेहरा छिपाकर, बार बार मुंह धोया है क्या

हवा में सीलापन सा क्यों है ?कही पे कोई रोया है क्या?

~इंदिरा

somkritya

"in nonsense is strength"

Der Weg ist das Ziel

Via destinatum est .The journey is the destination .

CreativeSiba

I am a Banker cum Blogger and a Photographer.My Blogs will definitely take you deep in to my Photography skills along with my words flowing in to sentences.I will share My Poetic as well as Shayeri moods as well.Be Happy........

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