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Tag Archives: जीवन

अब भी है वक़्त

कभी इस बात कभी उस बात पर रोना आया

सोचा तो अपनी हरेक बात पर रोना आया 
अपनी मस्ती में जिए देश की परवाह न की 
बिगड़े  हैं देश हालात तो रोना आया 
कभी रोकर कभी सोकर समय काट लिया 
अब जो काटा  है समय ने तो रोना आया 
अब भी है वक़्त बचे को तो सम्हाल ही लो 
भाग्य के नाम पर सब छोड़ पलायन न करो 
अब जो चुप बैठे तो जीवन भर पछताओगे 
बिगड़ी हुई बात बनाले उसे ही जीना आया 
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पिंजरे का पंछी

लाकर मुझको तूने था एक पिंजरे में डाला

सोने के नुपुर दिए  भी सोने वाला
मरना था आसान नहीं पिंजरे को ही अपनाया
तेरे  दाना पानी को ही अपना मैंने जाना
मुक्त गगन के पंछी मुझपे हँसा करते थे
पर तेरे प्यार के आगे सीखा शीश झुकाना
तेरी चाहत खत्म हुई  मन तेरा भरपाया
अब पिंजरे खोलके तू कहता है अब उड़ जाना
उड़जा जहाँ भी जी चाहे वापस मत तू आना
आदत हो गयी पिंजरे की अब कैसी आज़ादी
मैंने कब सीखा है अपने पंखों को फैलाना
~इंदिरा

 

Bird-in-a-Cage

फलसफा

Reflexion

Reflexion

देखिये तो लोग

यहाँ कितने मूढ़ हैं

काटे  उसी डाल  को
जिसपर आरूढ़ हैं
जो भी बोया काटे वही
जो भी दिया पाये वही
जीवन का फलसफा
इतना भी  नहीं गूढ़ हैं
– Indira
Thursday 7W in Hindi 6.8.15

Ahankaar/अहंकार

ये गर्दन है कि झुकना नहीं चाहती

झुकना तो चाहिए
 भगवान के सामने धन्यवाद में
किसी के सम्मान में
किसी के प्यार में
कृतज्ञता बोध में
अनुग्रह में
पर ये अकड़ी रहती है
अहंकार में
खुद को सर्वश्रेष्ठ समझने के अभिमान में
जानती नहीं
जब अंत आता है
सब समान हो जाते हैं
क्या राजा क्या रंक
कोई चन्दन चिता चढ़े
या साधारण लकड़ी
जलते सभी हैं एक समान
पर जब तक जीवन है
ये रहती है मदहोश
एक छलावे में
खुद  सर्वश्रेष्ट मानती
ये गर्दन है की झुकना नहीं जानती

Jeet-Haar/ जीत-हार

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जीवन के हैं मजे निराले जैसे कोई खेल हो
कभी क्रिकेट,कभी है हौकी
कभी खेलों की भेल हो
कभी बीबी की हर ball पर छक्के  खूब लगाते  हो
कभी बच्चे की इक  गुगली पर clean बोल्ड  हो जाते हो.
कभी दुश्मनों के सौ मुक्के खाकर भी  हँसते जाते हो
कभी दोस्त के इक मुक्के से धराशायी हो जाते हो.
कभी चुनावी शतरंज में हर बाज़ी जीते जाते हो
कभी विपक्षी की  इक चाल पे चेक मेट हो जाते हो

Sharing Thoughts

जीत-हार

जिन्दगी सोचिये तो मजे का एक खेल है
या फिर सब खेलों की
मिलीजुली भेल है|
पति/पत्नी एक दूजे की हार बlल पे छक्के जमाते है
और कभी कभी बच्चे की एक गुगली पे  बोल्ड हो जाते हैं |
कभी आप ऑफिस में साथियों को
शतरंज के मोहरों की तरह नचाते हैं
कभी बॉस की एक चाल से चेकमेट हो जाते हैं|
कभी दुश्मनों के दस मुक्के हंस के झेल जाते हैं
कभी दोस्त के एक मुक्के से धराशायी हो जाते हैं|
कभी जिन्दगी की पूरी पारी खेल जाते हैं
कभी अम्पायर ऊँगली उठा देतो
आधी पारी में ही आउट हो जाते हैं|
एक ही जिंदगी में कई खेलों का मजा पाते हैं
कभी जीत के हार
कभी हार के जीत जाते हैं|

~ Indira

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ज्ञान की भीख/ Gyan Ki Bhikh

हिंदी मेरी मातृभाषा है अत: मेरा एक हिंदी ब्लॉग होना ही चाहिए जिसमे मैं अपनी भाषा में अपने मन के उदगार लिख सकूँ |

सारा जीवन घूम के, ज्ञान के मोती जमा किये,
सोचा साथ ना जायेगा, कहाँ मैं घूमू लिए लिये |
मोती बाँटन ज्ञान के ,जब बंजारा हुआ खड़ा ,
देखा यहाँ तो हर कोई, है मोती से हुआ जड़ा|
शीश झुकाया उसने सबको,और ये बात है मानी,
समझदार हैं सभी यहाँ ,सभी यहाँ पर ज्ञानी|
अब उसने है बंद की, देना सब को सीख,
अपना ज्ञान भुलाकर मांगे ,सबसे ज्ञान की भीख |

~Indira

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