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Tag Archives: Hindi Kavita

पुल

तुम्हारी  मेरी सोच नहीं मिलती 

तकरार बढ़ते जाते हैं

जो ना समय से  रोका तो  

मनमुटाव जरूरत से ज्यादा बढ़ जाते है

फासले बढ़ते जाते हैं

मौन को मत गहराने दो

संवाद बने रहने दो

बातों से भी तो मसले हल किये जा सकते है

अहम् की दीवार बीच में ना आने दो

रिश्ते मत तोड़ो

रिश्तों में दरार ना आने दो 

अहम् को इतना भी ना खींचो  कि

पुल बनाने की जगह न बचे 

मिलें तो एक दुसरे को देख मुंह फेर ले 

Maa/ माँ

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बचपन में कहते

माँ एक कहानी सुना
अब कहते माँ
कोई कहानी मत बना
पहले मेरे  आंसुओं पर
तुम्हारे आंसूं पड़ते  निकल
अब मां  के आंसूं
लगते  इमोशनल  ब्लैकमेल
कहाँ कोई गलती हो जाती है
या शिक्षा में कुछ  कमी रह जाती है
समझने समझाने में
एक उम्र निकल जाती है
खुशनसीब मिलता है वो
जिन्हे मिलता प्यार उम्र भर
वर्ना कई दाने दाने को तरसते हैं
भटकते हैं दर बदर
~Indira

हमारे नेता

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जब नेता सोये,  जनता रोये

जब जनता सोये, नेता खुश
मौज करेंगें , राज करेंगें
नए नए नारे और वादे
जनता को बेहोश रखेंगे
जागन की कोशिश जो करेंगे
करेंगे उसकी टायें  टायें फुस
अपनी ढपली खुद ही बजाएं
अपना अपना महिमा गान
काम काज अब कौन करे
जब  होये बिना काम मतलब सिद्ध
किस्मे  हिम्मत है
कौन करे गुब्बारा  फुस्स
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मलाल / Malal

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बींधा
तीखी बातों से
एक दूजे को
हरदम
अब देखो वो जख्म
भीतर कैसे पलता है
लाख बिसारना चाहो
कांटे सा कसकता है
टीस उठे  हर  वक़्त
मरहम काम  ना करता है
नासूर बन न  जाये कहीं
हरदम  खून सा रिसता  है
वक़्त पर माफ़ी
मांग ली होती,
रहता नहीं मलाल
तुम भी चुप बैठे रहे
जैसे फर्क क्या पड़ता है
अहम् हमारा टकराये
मन कांच दरकता है
मन आहत पर
चेहरा बुजदिल
मुस्कानों को ढोता
हर रिश्ते का
एक मुखौटा
चिपका लेता है
~ इंदिरा

नाते -रिश्ते 

कितने नाते टूट गए 

कितने साथी रूठ  गए 
हम तो जहाँ थे  वहीँ रहे 
ना  जाने  सब कहाँ पर छूट गए 
नए नए साथी, नए नए रिश्ते 
बने  भी और बिखर गए 
जिससे  जितनी लिखी थी 
उतना ही साथ निभा गए 

यादें ही रह जाती हैं 

बस बातें ही बच जाती हैं 
कमी बहुत खलती है  मगर
दिन भी यूं ही  गुज़र गए 
भीड़ में आँखे खोजती हैं 
भूले , भटके ,कोई मिल जाए 
पर दुनिया एक सराय  है 
स आये, ठहरे और चले  गए 
~ इंदिरा 

एक कविता डोंगी बाबाओं भक्तों और के नाम पर

एक कविता डोंगी बाबाओं और भक्तों के नाम पर 

दाढ़ी बाल  बढ़ाये के बन  बैठे ये  संत,

उसे संवारें समय गवाएं मोह का नाहीं अंत

मोह का नाहीं अंत करें न कछु भलायी 

मार  काट करें धरम नाम पर अहम् से प्रीत लगाई

अहम् से प्रीत लगाई  सबको समझे  ओछा 

करो अंत इन सबका मारो झाड़ू पोछा

मारो झाड़ू पोछा क्योंकि  धरम तो प्यार सिखावे

और  ये करते धरम नाम पर  घोटाले और  दिखावे

घोटाले और दिखावे कर ये अपना घर  हैं भरते

ज्ञानी सारे  समझ समझ के भी इन पर हैं  मरते

इन पर हैं मरते डरें की कैसे खोलें इनकी पोल

मरवा डालेंगे अच्छा है पीटो इनकी ढोल

पीटो इनकी ढोल बनो मूरख अज्ञानी

भोगो नरक यहीं जो खुद की कदर न जानी

खुद की कदर न जानी जिंदगी इनके द्वार गवाई 

मांगता बनकर जिए समझ न फिर भी आयी

 

समझ न फिर भी आयी हाथ भी कुछ ना आया 

 

धन दौलत बाबा ने लूटी तुमको नाच नचाया 

 

तुमको नाच नचाया जेल में अब ये सड़ेंगे 

 

सुबह शाम अब जेल में ये चक्की पीसेंगे

 

चक्की पीसेंगे कर्मों का फल अब ये भोगेंगे 

 

भक्त रहे न घर या घाट के दूजा बाबा खोजेंगे 

~Indira

दोस्त/ Dost

 

क्या क्या हमने खोया होता, जो हम कभी ना मिलते
यादों के जो फूल खिले हैं वो फिर कभी न खिलते

कितनी खुशियाँ बांटी हमने दुःख भी साथ सहे हैं
कितने तनहा रह जाते जो तुम न हमको मिलते

जितना जाना,जितना समझा वो क्या कम था वरना
तुम्हें समझ पाने की हसरत दिल में ले कर मरते

वो तो किस्मत अच्छी थी जो तुमसे दोस्त मिले हैं
वरना तुमसे दोस्त बड़ी किस्मत वालों को हैं मिलते

Beauty - Copy

हौसला

कभी कभी हमबिस्तर भी मीलों दूर हो  जाते हैं
कभी हजारों मील दूर भी दिल के पास आजाते हैं
बस! दिलों में प्यार होना चाहिए|
कभी तो  थाली भर भोजन भी तृप्त नहीं कर पाता है
कभी तो सूखी रोटी में  भगवान  नजर आ जाते हैं
बस! भूख होना चाहिए|
कभी हजारों पन्नों में भी  दिल की बात नहीं आती है
कभी कभी तो एक नजर भी  कितना कुछ कह जाती है
बस! व्यक्त करना आना चाहिए |
कभी हवा का झोंका भी धराशायी कर जाता है
कभी हजारों तूफां भी हिला नहीं तुम्हें पाते है
बस! हौसला होना चाहिए|

~Indira

Prayer to Godess Saraswati/ माँ सरस्वती से एक प्रार्थना

माँ सरस्वती वर दे वर दे 
माँ सरस्वती वर दे वर दे
 
मेरा कंठ सुरों से भर दे 
दे विद्या, बुद्धि और सुमति  
दिल में मेरे भर तेरी  भक्ति 
मूक बधिर को दे दे वानी 
बुद्धि उन्हें जो हैं  अज्ञानी 
सबको दे विद्या का दान 
बनें विनम्र भूलें  अभिमान 
एक दूजे को समझे अपना 
पूरा हो एकता का सपना
बस इतनी सुन ले अरदास  
हम सब तो है तेरे दास 
वीणा वादिनी वर दे वर दे 
~ Indira

नासमझ दिल

कितने सपने देखें
और कितना मन को मारें
दिल को कौन बताये
लाख जतन करो सब कुछ पालूं
फिर भी कुछ छूट ही जाये
दिल को कौन बताये
आधा छोड़ पूरे भाग न मनवा
जो है वो भी छिन ना जाये
दिल को कौन बताये
अपनी सीमा खुद पहचानो
जितनी चादर पाओं पसारो
दिल को कौन बताये
सब की अपनी मजबूरी है
कब तक कोई साथ निभाए
जब तक का है साथ किसीका
हंस कर ले बतियाये
दिल को कौन बताये

Timeless Mind

All about self realisation, paranormal, dream interpretation and more

Life in Copenhagen

Life in Copenhagen, Denmark, after moving during Covid-19.

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