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Tag Archives: Hindi poems

नाते -रिश्ते 

कितने नाते टूट गए 

कितने साथी रूठ  गए 
हम तो जहाँ थे  वहीँ रहे 
ना  जाने  सब कहाँ पर छूट गए 
नए नए साथी, नए नए रिश्ते 
बने  भी और बिखर गए 
जिससे  जितनी लिखी थी 
उतना ही साथ निभा गए 

यादें ही रह जाती हैं 

बस बातें ही बच जाती हैं 
कमी बहुत खलती है  मगर
दिन भी यूं ही  गुज़र गए 
भीड़ में आँखे खोजती हैं 
भूले , भटके ,कोई मिल जाए 
पर दुनिया एक सराय  है 
स आये, ठहरे और चले  गए 
~ इंदिरा 
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Prayer to Godess Saraswati/ माँ सरस्वती से एक प्रार्थना

माँ सरस्वती वर दे वर दे 
माँ सरस्वती वर दे वर दे
 
मेरा कंठ सुरों से भर दे 
दे विद्या, बुद्धि और सुमति  
दिल में मेरे भर तेरी  भक्ति 
मूक बधिर को दे दे वानी 
बुद्धि उन्हें जो हैं  अज्ञानी 
सबको दे विद्या का दान 
बनें विनम्र भूलें  अभिमान 
एक दूजे को समझे अपना 
पूरा हो एकता का सपना
बस इतनी सुन ले अरदास  
हम सब तो है तेरे दास 
वीणा वादिनी वर दे वर दे 
~ Indira

और फिर नारी ने कहा

और फिर नारी ने कहा
हे नर !

मैं तो हमेशा से वहीँ हूँ 

जहाँ मुझे होना था 

न तुम्हारे आगे न पीछे 
न ऊपर न नीचे 
बस बराबरी में
मुझे तो कभी भी महान बनने की चाहत न थी 
तुम ही हमेशा  ऊंचा बनने की होड़ में लगे रहे 
महान बनने के रास्ते तो और भी थे
उन पर चल तुम ईश्वर बन सकते थे 
पर तुमने यह क्या किया ?   
मुझे नीचा  दिखाने की कोशिश में 
खुद से कमजोर जताने  की ख्वाहिश में 
खुद को महान  दिखाने की चाहत में 
मुझ पर बलात्कार और जुर्म कर 
खुद को ही नीचा गिरा कर 
मुझ स्वतः ही  उपर  उठा दिया 
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Painting by Sharmila Kiri

नासमझ दिल

कितने सपने देखें
और कितना मन को मारें
दिल को कौन बताये
लाख जतन करो सब कुछ पालूं
फिर भी कुछ छूट ही जाये
दिल को कौन बताये
आधा छोड़ पूरे भाग न मनवा
जो है वो भी छिन ना जाये
दिल को कौन बताये
अपनी सीमा खुद पहचानो
जितनी चादर पाओं पसारो
दिल को कौन बताये
सब की अपनी मजबूरी है
कब तक कोई साथ निभाए
जब तक का है साथ किसीका
हंस कर ले बतियाये
दिल को कौन बताये

अब भी है वक़्त

कभी इस बात कभी उस बात पर रोना आया

सोचा तो अपनी हरेक बात पर रोना आया 
अपनी मस्ती में जिए देश की परवाह न की 
बिगड़े  हैं देश हालात तो रोना आया 
कभी रोकर कभी सोकर समय काट लिया 
अब जो काटा  है समय ने तो रोना आया 
अब भी है वक़्त बचे को तो सम्हाल ही लो 
भाग्य के नाम पर सब छोड़ पलायन न करो 
अब जो चुप बैठे तो जीवन भर पछताओगे 
बिगड़ी हुई बात बनाले उसे ही जीना आया 

Anurodh/अनुरोध

अनुरोध

कब तलक मैं ही कहे जाऊं

नया वक़्त है नए ख्याल
नयी सदी है नया उबाल
जोश है तुममे दम  है तुममे
अब तुम कहो
मौन मैं हो जाऊं
मिटने दो पुराने को
देखो नए स्वप्न
मिटा कर पुराने को भर दो नए रंग
वक़्त पूरा हुआ मेरा
तुम सम्हालो ये दुनिया
तुम नए स्वप्न बुनो
और मैं सो जाऊं

 

MAN( मन)

 मन
मन एक अबूझ पहेली सा है                                  confused cat
भीड़ में अकेला
और
अकेलेपन में भीड़ से भर जाता है
कभी कभी निन्यानवे के चक्कर में पड़ेगा
कभी बिना कुछ ही खुश हो जाता है

वैसे  बकबक करता रहता है

अनवरत

सोने भी नहीं देता पर कुछ लिखने  कोशिश करो
तो सब बिसरा सा  जाता है
समझ नहीं आता
यह बस मेरा हाल है
या, सभी के साथ ऐसा हो जाता है
कौन इसे समझाए
जितना  कुछ पकड़ पाओ तो सोना है
वरना  सब मिटटी हो जाता है.
Reena Saxena

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