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Tag Archives: Indian blogger

Prayer to Godess Saraswati/ माँ सरस्वती से एक प्रार्थना

माँ सरस्वती वर दे वर दे 
माँ सरस्वती वर दे वर दे
 
मेरा कंठ सुरों से भर दे भर दे
दे विद्या, बुद्धि और सुमति  
दिल में मेरे भर तेरी  भक्ति 
मूक बधिर को दे दे वानी 
बुद्धि उन्हें जो हैं  अज्ञानी 
सबको दे विद्या का दान 
बनें विनम्र भूलें  अभिमान 
एक दूजे को समझे अपना 
पूरा हो एकता का सपना
बस इतनी सुन ले अरदास  
हम सब तो है तेरे दास 
वीणा वादिनी वर दे वर दे 
~ Indira

AITBAR/ ऐतबार

कहीं पर है सूखा कहीं पर है बाढ़,

पीने को पानी फिर भी हर जगह कम है ।

बादल देखा कर तोड़ो न तुम मटके ,
गरजते बादलों पे भरोसा जरा कम है ।
कागज की नाव लिए उदास हैं बच्चे,
नालों खड्डों में भी पानी बहुत कम है।
मंहगाई की मार  से परेशान है सरकार भी,
वादों में जोश ज्यादा आँखों में पानी कम है।
मुश्किल से मिली कुर्सी कहीं फिर से छिन  न जाए,
अपने ही किये वादों पे ऐतबार उन्हें कम है।

अजीब मगर सच्ची

हीरा चढ़ता मत्थे पे, पत्थर ठोकर खाए ,
ईश्वर  मूरत में ढले, पत्थर भी उबरे जाए |
 दिन भर खट  कर  भी कोई, भूखे  पेट सो जाए ,
बिन मेहनत की  पुरोहिती, पेट भरे जस पाए |
औरत मेहनत कर मरे , फिर भी पीटी  जाए,
पैसा शक्ति, लाये तभी , मंदिर में पूजी जाए |
जब तक मतलब साथ थे, पूछ पूछ के अघाये,
पंख ने जिस दिन भरी उड़ान सब को दिया भुलाए |
छाप अंगूठा रोये क्यों,  राजनीति  घुस जाए,
पैसा पॉवर मिले तो, सर्वगुन्न  कहलाये |
सब कुछ पाया प्रेम न पाया, जिया काहे  अकुलाये,
माया, काया  के चक्कर,  जब जीवन दिया गवाए |

MUFT GYAN/ मुफ्त ज्ञान

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क्या पता बारिश इस बार भी दगा दे , बादल देख कर मटके फोड़ा नहीं करते |

सदियाँ गुज़र जाती हैं रिश्ते बनाने में, एक जरा सी बात पर रिश्ते तोड़ा नहीं करते |

क्या पता कौन कब दगा दे जाए, एक ही मुलाकात में रिश्ते जोड़ा नहीं करते |

खामोखां किसी को कोई मुगालता क्यों हो, उँगलियों से यूँ पल्लू मरोड़ा नहीं करते |

हर कोई आपके हुस्न का दीवाना नहीं है,यूँ ही बेमतलब हिज़ाब ओड़ा नहीं करते |

न जाने कौन अजनबी कब मीत बन जाए, किसी को देख कर यूँ मुंह मोड़ा नहीं करते |

तरक्की पर तो हर किसी का हक़ है, दूसरों की राह का रोड़ा नहीं बनते |

आराम करने के मौके तो मिलेंगे बहुत, यूँ ही बेवक्त खटिया तोड़ा नहीं करते

जाने वाला चल दिया तनहा छोड़ कर, यूँ ही हंस कर गम थोड़ा नहीं करते |

मज़हब तो दिलों को मिलाने को बना है, मज़हब के नाम पर सर तोड़ा नहीं करते |

_ Indira

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PREMRAAG/ प्रेमराग

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प्रेम क्या है मुझे पता नहींप्रेम क्या नहीं है वो बताती हूँ |

प्यार रास नहीं,रंग रोमांस नहीं
मन में पल भर को उठा
कोई खुमार नहीं|
प्यार सौदा नहीं,कोई व्यापर नहीं
तू ना दे तो में ना दूं
ऐसा कारोबार नहीं|
सृष्टि बस मेरी,किसीऔर का अधिकार नहीं
जब हो सोच ऐसी
फिर तो वहां प्यार नहीं|
प्यार अकृतज्ञता नहीं
इर्ष्या और स्वार्थ नहीं
कटुता और हिंसा से
इसको सरोकार नहीं|
इसके बाद जो भी बचे वोही तो प्यार है
तुम स्वयं प्यार हो बाकि सब बेकार है|

http://rosesandcoffee.wordpress.com/2014/11/18/what-is-love/

Indira's Blog

प्रेम क्या है मुझे पता नहींप्रेम क्या नहीं है वो बताती हूँ |

प्यार रास नहीं,रंग रोमांस नहीं
मन में पल भर को उठा
कोई खुमार नहीं|
प्यार सौदा नहीं,कोई व्यापर नहीं
तू ना दे तो में ना दूं
ऐसा कारोबार नहीं|
सृष्टि बस मेरी,किसीऔर का अधिकार नहीं
जब हो सोच ऐसी
फिर तो वहां प्यार नहीं|
प्यार अकृतज्ञता नहीं
इर्ष्या और स्वार्थ नहीं
कटुता और हिंसा से
इसको सरोकार नहीं|
इसके बाद जो भी बचे वोही तो प्यार है
तुम स्वयं प्यार हो बाकि सब बेकार है|

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AJEEB BAAT/ अजीब बात

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बड़ी अजीब बात है
बड़े प्यारे नगमे हैं,गज़लें हैं,गीत हैं ,
पर हिट लिस्ट में कुछ और ही गीत आते हैं.
महान कवि नीरज
फिल्मों में सन्डे को प्यार हुआ,monday इकरार हुआ
लिख आते हैं.
गुलज़ार दिल को छूने वाले नगमों के बाद, ‘बीडी जलायले जिगर ‘से ज्यादा नाम कमाते है.
जावेद जी ,जिनके हर नगमे पे हम दिल वार आते हैं,
एक,दो,तीन, चार…………बारह,तेरह से, ज्यादा प्रसिद्धि पाते हैं.
दिल को छूने वाले नगमे हम बस उदासी में
या महफिलों में गाते,सुनते,और सुनाते हैं
पर हिट?
कोलावारी-डी को करवाते हैं.

Kanhi Par Koi Roya Hai Kya? /कही पे कोई रोया है क्या?

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हवा में गीलापन सा क्यों है कहीं पे कोई रोया है क्या?

महलों में  सब सुविधा पाकर भी कोई तो   हँस  ना पाए,

जूठन पाकर झोपड़ीवाला  ख़ुशी के मारे  रोया है क्या?

दिन भर खूब मजूरी की पर  शाम को खाना  घर न आया

बिलख बिलख कर रोते कोई  भूख का मारा  सोया है क्या ?

अपने लालच में जो सारे  पेड़ तो हमने  काट लिए,

बीज कभी भी बोये नहीं,ये सोच के कोई रोया है  क्या?

बेटियां कितनी बलि चढ़ा  दी ,एक बेटे  के लालच में ,

आज उसी बेटी की खातिर माँ का दिल कहीं  रोया है क्या?

सागर से मिलने वाली  नदियों का जल जब  सूख  गया,

आस लगा कर बैठा सागर,बिलख बिलख कर रोया है क्या?

पापों का लेखा जोखा कर कहीं कोई ग़मगीन हुआ क्या

कहीं कोई शैतान ठिठक कर हँसते हँसते रोया है क्या?

यूं तो कारण बहुत मिले , रोज़ रोज़ हँसने  गाने के

बहलाने को चेहरा छिपाकर, बार बार मुंह धोया है क्या

हवा में सीलापन सा क्यों है ?कही पे कोई रोया है क्या?

~इंदिरा

somkritya

"in nonsense is strength"

Der Weg ist das Ziel

Via destinatum est .The journey is the destination .

CreativeSiba

I am a Banker cum Blogger and a Photographer.My Blogs will definitely take you deep in to my Photography skills along with my words flowing in to sentences.I will share My Poetic as well as Shayeri moods as well.Be Happy........

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