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Tag Archives: Indian blogger

AJEEB BAAT/ अजीब बात

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बड़ी अजीब बात है
बड़े प्यारे नगमे हैं,गज़लें हैं,गीत हैं ,
पर हिट लिस्ट में कुछ और ही गीत आते हैं.
महान कवि नीरज
फिल्मों में सन्डे को प्यार हुआ,monday इकरार हुआ
लिख आते हैं.
गुलज़ार दिल को छूने वाले नगमों के बाद, ‘बीडी जलायले जिगर ‘से ज्यादा नाम कमाते है.
जावेद जी ,जिनके हर नगमे पे हम दिल वार आते हैं,
एक,दो,तीन, चार…………बारह,तेरह से, ज्यादा प्रसिद्धि पाते हैं.
दिल को छूने वाले नगमे हम बस उदासी में
या महफिलों में गाते,सुनते,और सुनाते हैं
पर हिट?
कोलावारी-डी को करवाते हैं.

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Kanhi Par Koi Roya Hai Kya? /कही पे कोई रोया है क्या?

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हवा में गीलापन सा क्यों है कहीं पे कोई रोया है क्या?

महलों में  सब सुविधा पाकर भी कोई तो   हँस  ना पाए,

जूठन पाकर झोपड़ीवाला  ख़ुशी के मारे  रोया है क्या?

दिन भर खूब मजूरी की पर  शाम को खाना  घर न आया

बिलख बिलख कर रोते कोई  भूख का मारा  सोया है क्या ?

अपने लालच में जो सारे  पेड़ तो हमने  काट लिए,

बीज कभी भी बोये नहीं,ये सोच के कोई रोया है  क्या?

बेटियां कितनी बलि चढ़ा  दी ,एक बेटे  के लालच में ,

आज उसी बेटी की खातिर माँ का दिल कहीं  रोया है क्या?

सागर से मिलने वाली  नदियों का जल जब  सूख  गया,

आस लगा कर बैठा सागर,बिलख बिलख कर रोया है क्या?

पापों का लेखा जोखा कर कहीं कोई ग़मगीन हुआ क्या

कहीं कोई शैतान ठिठक कर हँसते हँसते रोया है क्या?

यूं तो कारण बहुत मिले , रोज़ रोज़ हँसने  गाने के

बहलाने को चेहरा छिपाकर, बार बार मुंह धोया है क्या

हवा में सीलापन सा क्यों है ?कही पे कोई रोया है क्या?

~इंदिरा

DUVIDHA/ दुविधा

एक चक्र रथ का है आगे आगे दौड़ता

दूसरा है घूमता वहीँ वहीँ

एक की चाह है आकाश को छूने की

दूसरा जमीं पे है अडिग खड़ा

एक जो ठान ले कर के है छोड़ता

दूजा कहे समय है बहुत पड़ा

एक की आँख में स्वप्न हैं नए नए

दूसरे की नींद टूटती नहीं

मन,विवेक चक्र हैं दो ,अलग अलग दौड़ते

तन है रथ असमंजस में है

किसका ये साथ दे किसको ये छोड़ दे

कैसे द्विधा में है ये तन पड़ा

एक चाल, एक राह एक ही से स्वप्न हों

तभी तो मंजिल की ओर सकता है कदम बढ़ा

~ इंदिरा

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AJAB SHEEKH/ अजब देश में गज़ब सीख

अपना घर सम्हलता नहीं देश सम्हालने के गुर बताते हैं
जिन्हें घर का बजट बनाना नहीं आता वो अर्थमंत्री को नुस्खे बताते हैं
जिन्होंने कभी बल्ला नहीं थामा वो  सचिन को बैटिंग सिखाते हैं
दूसरों का धन हड़पने वाले त्याग की महिमा सिखाते हैं
उर्वशी, रम्भा के सपने देखने वाले ब्रह्मचर्य की महिमा बताते हैं
स्त्री की मर्यादा न करनेवाले दुर्गा, काली, लक्ष्मी और सरस्वती को पूजते नज़र आते हैं
किसी ने खूब कहा है
अंजामे गुलिस्ता क्या होगा हर शाख पे उल्लू बैठा है
और हम कहिन
उस देश की रक्षा क्या होगी हर घर में दुश्मन पैठा है

~ Indirafrog in the rain

KHUCHH SAWAL/कुछ सवाल ???

कुछ सवाल ???

देश के नेताओं, पुलिस , और कुछ पुरुष (?) वर्ग के के उलटे सीधे बयां बड़ा परेशां करते हैं
कुछ प्रश्न मन में उमड़ते घुमड़ते हैं जिनके जवाब ढूंढे नहीं मिलते हैं
हुज़ूर!  कब और कैसे   औरतों को सुरक्षा प्रदान कर पाएंगे
अगर साड़ी  महिलाएं बुरखा पहन लें तो आप निर्लिप्त हो जायेंगे
छेड़खानी और बलात्कार से अपने को रोक पाएंगे
या फिर
लड़कियां महिलाएं घर में बंद बैठ जाएँ तो आप भी खुद को सम्हाल पाएंगे
आप तो नादान लड़कों को भी नहीं छोड़ते
कोई हद कोई लक्ष्मण रेखा तो बनाइये
औरत कुर्बानी की कितनी  हद है
जो आप को आपकी लक्ष्मण रेखा में बाँध रखे
या आपके लिये कोई सीमा,कोई लक्ष्मण रेखा नहीं है
आप माँ, पत्नी, बहन पर अत्याचार के लिए स्वतंत्र हैं
आप से बुद्धिमान,कुशल महिला आपसे देखी   नहीं जाती

Image0221हंसती खिलखिलाती महिला आप से देखी नहीं जाती
पर काटने को  आपकी आत्मा बैचैन हो जाती है
कहीं सब पर से आपका राज खत्म हो जाए
यही बात आपको सताए चली जाती है
आपके हिसाब से तो
लड़की जन्म ही नाले तो सारे अपराध खत्म हो जायेंगे
भ्रूण हत्या , दहेज़ प्रथा , छेड़खानी, बलात्कार सभी खत्म हो जाएँ
बस आप ही का राज हो, देश संसार धीरे धीरे बर्बाद हो आप को क्या
अभी आप राज करो फिर आप का बेटा
उसके बाद दुनिया खत्म हो जाए तो आपका क्या ???

~Indira

 

APNI JANG/अपनी जंग

अपने अपने आंसुओं को आँख में ही थाम रखो
कौन समझेगा तेरे आंसुओं का मोल यहाँ
सब उठाये फिरते हैं अपने दुखों का सलीब
कौन साथ दे और मरहम लगाएगा यहाँ
जो साथ आये रोने वो कम ग़मगीन न थे
जो भी रोया साथ आपबीती पे रोयेगा यहाँ
जोश भर हिम्मत जगा अपनी जंग खुद ही लड़,
है सबकी अपनी अपनी जंग हौसला कौन देगा यहाँ
अपने दुखड़े सुना सुना दूसरों को पस्त न कर
कौन सुने तेरी सुनाने को सब बेताब यहाँ
करोड़ों हड़प के भी नहीं मिटती है भूख उनकी
कौन तय करेगा असली भिखामंगा है कौन यहाँcat on the beech

Desh Ka Haal/ देश का हाल और लोग बेहाल

आप तो खामोखा नाराज हो जाते हैं
देश के हाल पे क्यों इतना बवाल मचाते हैं
क्या आप दुखी हैं किबहस का मुद्दा
कालाधन, भ्रष्टाचार ,नीतिहीनता क्यों है ?
अरे भाई ,
कालाधन, भ्रष्टाचार ,नीतिहीनता अगर देश प्रेमी और स्वार्थहीन चलाते
तो गरीबों की समस्याओं, शिक्षा और,देश उन्नति पर बहस बिठलाते ।
शासन राजहंसों के हाथ हो
तो, मोती , हिमालय, मानसरोवर
और पवित्रता पर बहस होगी
और शासन अगर कौओं के हाथ हो
तो बहस भी छिछ्ड़ों पर ही होगी |

Reena Saxena

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