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Tag Archives: Indian politics

हमारे नेता

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जब नेता सोये,  जनता रोये

जब जनता सोये, नेता खुश
मौज करेंगें , राज करेंगें
नए नए नारे और वादे
जनता को बेहोश रखेंगे
जागन की कोशिश जो करेंगे
करेंगे उसकी टायें  टायें फुस
अपनी ढपली खुद ही बजाएं
अपना अपना महिमा गान
काम काज अब कौन करे
जब  होये बिना काम मतलब सिद्ध
किस्मे  हिम्मत है
कौन करे गुब्बारा  फुस्स
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AITBAR/ ऐतबार

कहीं पर है सूखा कहीं पर है बाढ़,

पीने को पानी फिर भी हर जगह कम है ।

बादल देखा कर तोड़ो न तुम मटके ,
गरजते बादलों पे भरोसा जरा कम है ।
कागज की नाव लिए उदास हैं बच्चे,
नालों खड्डों में भी पानी बहुत कम है।
मंहगाई की मार  से परेशान है सरकार भी,
वादों में जोश ज्यादा आँखों में पानी कम है।
मुश्किल से मिली कुर्सी कहीं फिर से छिन  न जाए,
अपने ही किये वादों पे ऐतबार उन्हें कम है।

प्याज पुराण

कैसे दिन हैं आ गये; मंत्री बेचे प्याज ,
लूट करोड़ों खाए थे,सबके उतरेंगे ताज ।
सूखी रोटी नमक से; और साथ में प्याज ,
भूखों का मेवा था ये, उसको भी तरसे आज।
सब्जी तो महंगी हुयी; और रुलाये प्याज ,
भूखे पेट करें तो कैसे राम भजन और काज।
सोच विचार नेतागण भैय्या; सस्ते बेंचे प्याज,
पुलकित मन में, वोट मिलेंगे, और करेंगे राज।

~ Indira

onions

Desh Ka Haal/ देश का हाल और लोग बेहाल

आप तो खामोखा नाराज हो जाते हैं
देश के हाल पे क्यों इतना बवाल मचाते हैं
क्या आप दुखी हैं किबहस का मुद्दा
कालाधन, भ्रष्टाचार ,नीतिहीनता क्यों है ?
अरे भाई ,
कालाधन, भ्रष्टाचार ,नीतिहीनता अगर देश प्रेमी और स्वार्थहीन चलाते
तो गरीबों की समस्याओं, शिक्षा और,देश उन्नति पर बहस बिठलाते ।
शासन राजहंसों के हाथ हो
तो, मोती , हिमालय, मानसरोवर
और पवित्रता पर बहस होगी
और शासन अगर कौओं के हाथ हो
तो बहस भी छिछ्ड़ों पर ही होगी |

Choohe-चूहे

चूहे

एक समय की बात है
श्रीगणेश भोग लगाते थे
और चूहे प्रसाद से तृप्त हो जाते थे
अब चूहे भोग लगाते हैं
और प्रसाद भी हड़प जाते हैं
भगवान् सिर्फ मूर्ती बने देखते ही रह जाते हैं
ठीक उसी तरह जैसे जनता की भलाई में लगाया जाने वाला धन
चूहे रुपी भृष्ट लोग हड़प जाते हैं
देश एक जहाज है
कहते हैं ,
जब जहाज डूबने लगता है तो सबसे पाहिले
चूहे भाग जाते हैं
पर उस जहाज का क्या
जिसे चूहे ही चलाते हैं |

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